बायें हाथ से काम करने वालों का दिन – 13 अगस्त

बायें हाथ से काम करने वालों का दिन – 13 अगस्त

अखबार ने बताया कि आज लैफ्ट हैंडर्स डे है। जब भी इस तरह के डे की बात पढ़ता हूं तो यही अफसोस होता है‍ कि बरस भर के बाकी दिन तो दूसरों के लिए लेकिन एक दिन आपका। अब चाहे मदर्स डे हो या फादर्स डे। साल में सिर्फ यही दिन आपका। भले ही अपने देश का करवा चौथ का व्रत ही क्‍यों न हो। बेचारे पति के हिस्‍से में पूरे बरस में एक ही दिन आता है। जवाब में आप ये भी कह सकते हैं कि बेचारी महिलाओं के हिस्‍से में भी तो बरस भर में एक ही वीमेंस डे आता है। बाकी दिन तो उन्‍हें कोई याद नहीं करता।

तो बात चल रही थी लैफ्ट हैंडर्स डे की। मेरे पिता बेशक खब्‍बू थे लेकिन बचपन में हुई पिटाई के कारण दायें हाथ से लिखने के अलावा जीवन भर अपने सारे काम बायें हाथ से करते रहे। चाहे टेबिल टेनिस खेलना हो, कैरम खेलना हो या खाना खाना हो।

यही हाल मेरे बड़े भाई का रहा। वे खब्‍बू होने के बावजूद लिखने सहित अपने सारे काम दायें हाथ से करने को मजबूर हुए और नतीजा ये हुआ कि वे जिंदगी में जितनी तरक्‍की कर सकते थे। नहीं कर पाये। औसत से कम वाली जिंदगी उनके हिस्‍से में आयी।

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मेरा छोटा बेटा भी खब्‍बू है। लेकिन उसे अपने सारे काम बायें हा‍थ से करने की पूरी छूट है। बेशक वह गिटार दायें हाथ से बजा लेता है और पीसी पर माउस भी दायें हाथ से ही चलाता है। पीसी की वजह समझ में आती है कि पीसी पूरे घर का सांझा है और वह इस बात को ठीक नहीं समझता कि बार बार सेटिंग करके माउस को अपने लिए लैफ्ट हैंडर बनाये। बाकी काम वह बायें हाथ से ही करता है।

मुझे याद पड़ता है कि हमारे बचपन में खब्‍बुओं को मार मार कर सज्‍जू कर दिया जाता था। (पंजाबी में बायें हाथ को खब्‍बा और दायें हाथ को सज्‍जा हाथ कहते हैं)। मजाल है आप कोई काम खब्‍बे हाथ से कर के दिखा दें। घर पर तो पिटाई होती ही थी। मास्‍टर लोग भी अपनी खुजली उन्‍हें मार मार कर मिटाते थे। दुनिया में पूरी जनसंख्‍या के तीस से पैंतीस प्रतिशत लोग खब्‍बू तो होते ही होंगे लेकिन ये भारत में ही और वो भी उत्‍तर भारत में ज्‍यादा होता है‍ कि बायें हाथ से काम करने वाले को पीट पीट कर दायें हाथ से काम करने पर मजबूर किया जाता है। उसका मानसिक विकास तो रुकेगा ही जब आप प्रकृति के खिलाफ उस पर अपनी चलायेंगे।

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मैंने सिर्फ गुजरात में ही देखा कि क्‍लास में और ट्रेनिंग सेंटर्स में भी इनबिल्‍ट मेज वाली कुर्सियां लैफ्ट हैंडर्स के लिए भी होती हैं बेशक तीस में से पांच ही क्‍यों न हों।
कहा जाता है कि पहले के ज़माने में युद्धों में बायें हाथ से लड़ने वालों को तकलीफ होती थी। वे मरते भी ज्‍यादा थे क्‍यों‍कि सामने वाले के बायें हाथ में ढाल है और दायें में तलवार। वह अपने सीने की रक्षा करते हुए सामने वाले के सीने पर वार कर सकता था लेकिन खब्‍बू महाशय के बायें हाथ में तलवार और दायें हाथ में ढाल है। बेचारा दिल तो उनका भी बायीं तरफ ही रहता था। नतीजा यही हुआ कि लड़ाइयों की वजह से खब्‍बू ज्‍यादा शहीद होते रहे और दुनिया की जनसंख्‍या में उनका प्रतिशत भी कम हुआ। ये एक कारण हो सकता है।

मैं विदेशों की नहीं जानता कि वहां पर लैफ्ट हैंडर्स के साथ क्‍या व्‍यवहार होता है। लेकिन ये मानने में कोई हर्ज नहीं कि उन्‍हें सम्‍मान तो मिलता ही होगा उन्‍हें भी तभी तो वे लैफ्ट हैंडर्स डे मनाने की सोच सकते हैं। पिटाई तो उनकी वैसे भी नहीं होती। आइये जानें दुनिया के कुछ खास खास खब्‍बुओं के बारे में। जरा सोचिये, अगर इन सबको भी पीट पीट कर सज्‍जू बना दिया जाता तो क्‍या होता। ये है सूची – महात्‍मा गांधी, सिंकदर महान, हैंस क्रिश्चियन एंडरसन, बिस्‍मार्क, नेपोलियन बोनापार्ट, जॉर्ज बुश सीनियर, जूलियस सीजर, लुइस कैरोल, चार्ली चैप्लिन, विंस्‍टन चर्चिल, बिल क्लिंटन, लियोनार्डो द विंची, अल्‍बर्ट आइंस्‍टीन, बेंजामिन फ्रेंकलिन, ग्रेटा गार्बो, इलियास होव, निकोल किडमैन, गैरी सोबर्स, ब्रायन लारा, सौरव गांगुली, वसीम अकरम, माइकल एंजेलो, मर्लिन मनरो, पेले, प्रिंस चार्ल्‍स, क्‍वीन विक्‍टोरिया, क्रिस्‍टोफर रीव, जिमी कोनर्स, टाम क्रूज, सिल्‍वेस्‍टर स्‍टेलोन, बीथोवन, एच जी वेल्‍स और अपने देश के बाप बेटा बच्‍चन जी।

है ना मजेदार लिस्‍ट।

आज के दिन सभी लैफ्ट हैंडर्स को सलाम।

Written by ‘ सूरज प्रकाश ‘

Team Storymirror

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