मंटो की सुलगती सिगरेट

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आज से करीब तीन साल पहले मैंने कुछ लोगो ज़ोर से चिल्लाते हुए देखा l सबने काले कुर्ते पहने थे l मैं भी भीड़ में तमाशबीन बन उनको देखने लगा l भीड़ में कुछ लोग उनपर हँसते तो कुछ उन्हें देख अचंभित हो जाते l कुछ वक़्त बाद जब मैं उन लोगो की संगत में बैठा था, तो एक कहानी सुनी l कहानी की पृष्ठभूमि भारत, पाकिस्तान के विभाजन के वक़्त की है, जब एक लड़की, देश के रक्षको की हवस का शिकार बन पागल हो जाती है और उसके बाप की तलाश सिर्फ तलाश रह जाती है l कहानी का नाम था ‘खोल दो’ और उसको लिखा था ‘मंटो’ ने l मैंने सोचा ये ‘मंटो’ कैसा नाम है l ये मेरी मंटो से पहली मुलाकात थी l

‘सआदत हसन मर जायेगा

पर ‘मंटो’ कभी नहीं मरेगा’

       जन्म 11 मई 1912, ज़िला समराला, लुधियाना, पंजाब ये तो सब जानते ही होंगे l मौत 18 जनवरी 1955, लाहौर, पाकिस्तान l मंटो को जब अस्पताल ले जाया रहा था तब उनकी आखिरी ख्वाइश शराब की एक बूँद थी, जिसको वो पूरी ज़िन्दगी अपने साथ रखते आये थे l कभी उसके लिए झूठ बोला तो कभी अपने घर से अपनी ही तनख्वा चुराई l जब उनकी बीवी को उनके इस पागलपन के बारे में पता चला तो उन्हें पागलखाने में भर्ती करा दिया l उनके मन में कही न कही एक कसक थी भारत, पाकिस्तान के बँटवारे को लेकर l पागलखाने से ही उन्होने ‘टोबा टेक सिंह’ जैसी कहानी को हमारे सामने लाकर रखा l उनकी कहानियों में समाज का एक अलग ही रूप सामने आया l उनकी कहानी की नायिकाओ की भूमिका चूल्हे चोके तक ही सीमित नहीं रही l चाहे वो ‘काली सलवार’ की वेश्या ‘सुल्ताना’ हो या फ़िर ‘खोल दो’ की ‘सकीना’ l नायक उनकी कहानियो में था तो पर एक भूरा चोगा ओढ़े हुए l इनमे गली मोहल्ले में अपनी धाक ज़माने वाले ‘मम्मद भाई’ से लेकर पागलखाने से आवाज़ लगाने वाला ‘टोबा टेक सिंह’ शामिल है l जिनकी आँखों में सिर्फ अच्छाई ही नहीं बल्कि एक तरह का लाल रंग भी था l मंटो की कहानी आज की नदियों जैसी थी l जिनकी शुरुआत बड़ी खूबसूरत होती, बीच में आकर वो समाज की सच्चाई से रूबरू कराते और उसका अंत सड़ी गली तरह होता, जिसको कोई भी अपनाना नहीं चाहता l उनकी कहानियो में कोई ऊँची इमारते नहीं होती, उनकी कहानी किसी कोठे से शुरू होकर भूख, गरीबी और हवस की संकरी गलियों से होती हुई किसी खुली हवा की आज़ादी मांग रहे भिखारी पर आकर ख़त्म होती l उनके जीते जी उनकी कहानियो को फूहड़ता का तमगा दे दिया गया l आज मंटो को गए 60 साल से ज्यादा हो चुके है पर 60 साल पहले उनकी जलाई हुई सिगरेट आज धू-धू कर भभक रही है l

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Rahul Kumar

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